नई दिल्ली। चीन खुद को मुस्लिम देश पाकिस्तान का सबसे अच्छा दोस्त और सरपरस्त बताता है परंतु चीन की सरकार इस्लाम और मुसलमानों के प्रति क्या भावनाएं रखती है, इस प्रकरण में यही प्रमाणित होता है। शिंजियांग प्रांत के बाद पश्चिमी चीन के ‘लिटिल मक्का’ (गांसू प्रांत) में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी मुस्लिम बच्चों को धर्म और इस्लामिक शिक्षा से दूर रखना चाहती है। चीन में बहुत कम संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग है। शिंजियांग प्रांत में जो भी उईगर समुदाय के मुस्लिम बहुसंख्यक है, उनके खिलाफ पहले से ही चीन सरकार कई चीजों को लेकर उनका दायरा सीमित कर चुकी है।
दाड़ी नहीं रख सकते मुसलमान, मस्जिद पर देश का झंडा
वहीं अब ‘लिटिल मक्का’ में 16 साल से कम उम्र के बच्चों को नमाज और इस्लामिक शिक्षा से दूर रहने के लिए कहा है। चीन की सरकार ने ध्वनि प्रदूषण का तर्क देते हुए सभी 355 मस्जिदों से लाउड स्पीकरों को हटाने के लिए पहले से ही आदेश दे चुकी है। मस्जिदों के ऊपर चीन का राष्ट्रीय झंडा लगाने का भी आदेश दिया गया है। वहीं दाढ़ी रखने पर भी पाबंदी लगाई गई है।
मुस्लिम बच्चों को कुराने पढ़ने पर पाबंदी
‘लिटिल मक्का’ में गर्मी और सर्दी की छुट्टियों के दौरान एक हजार से ज्यादा बच्चे कुरान को समझने और पढ़ने के लिए मस्जिद आते हैं, लेकिन चीन की सरकार ने इस पर अब प्रतिबंध लगा दिया है। चीनी अधिकारियों ने मुस्लिम माता-पिताओं को कहा है कि कुरान की पढ़ाई को प्रतिबंध करने से उन्हीं के बच्चों को फायदा है। उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष पाठ्यक्रम अपनाने को कहा गया है।
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