किसी पुरानी चित्र गैलरी (या इतिहास की पुस्तक में) अन्य तत्कालीन नेताओं के साथ जिन्ना की भी तस्वीर लगा होना एक बात है, लेकिन एक ‘मुस्लिम’ नामधारी शिक्षा संस्थान के परिसर में जिन्ना या भारत के विभाजन में मुख्य भूमिका निभाने वाले किसी भी व्यक्ति की तस्वीर का लगा होना एकदम भिन्न बात है।
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