शैलेंद्र ने इस मामले में उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने कहा कि वाहन चोरी की सूचना देने में देरी करने पर उपभोक्ता को दोषी नहीं माना जा सकता है। एसडी अग्रवाल और डॉ. मोनिका की बेंच ने इंश्योरेंस कंपनी की सभी दलीलों को खारिज कर दिया।
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